The Rebirth Within Ruins
जब तुम ये सोचते हो कि
"अब तो सब ख़त्म हो गया,
मेरी ज़िंदगी बरबाद हो गई,"
ठीक उसी पल,
कहीं न कहीं तुम्हारे भीतर
एक नया अध्याय जन्म ले रहा होता है।
बरबादी असल में अंत नहीं होता,
वो एक अदृश्य शुरुआत होती है
जहाँ तुम्हारे टूटे हुए हिस्से
खुद से फिर जुड़ना सीखते हैं,
जहाँ आँसुओं से धुलकर
तुम्हारा असली चेहरा चमक उठता है।
कभी-कभी ज़िंदगी को
तुम्हें मिटाना पड़ता है,
ताकि तुम अपने भीतर के इंसान को
फिर से पहचान सको।
हार के उस अंतिम क्षण में ही
एक नई उम्मीद पलती है
वो जो कहती है,
"अभी नहीं... मेरा सफ़र यहीं खत्म नहीं हुआ।"
बरबादी बस एक शब्द नहीं,
वो पुनर्जन्म का दरवाज़ा है
जहाँ दर्द गुरु बन जाता है,
और तुम... अपनी किस्मत के निर्माता...
© विजय कमल

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