When Darkness Teaches You to Rise

 

Poem by Vijay Kamal


कभी-कभी वक्त

इतना अजनबी हो जाता है,

कि हर चेहरा धुंधला लगता है,

और हर आवाज़ ख़ामोश।


तुम सोचते हो 

“कोई तो समझेगा,

कोई तो हाथ पकड़कर कहेगा

चल… मैं हूँ ना।”


पर हक़ीक़त?

वक्त के सबसे कठिन मोड़ पर

कोई साथ नहीं चलता।

लोग बस दूर से देखते हैं,

गिरे हुए इंसान को उठाने से

सबको डर लगता है।


फिर वहीं,

उस गहरी उदासी की खाई में

एक सच्चाई अचानक जन्म लेती है 

कि बाहर का कोई हाथ

तुम्हें नहीं बचाएगा…

तुम्हें खुद ही

अंधेरे से बाहर आना होगा।


क्योंकि कुछ सफ़र ऐसे होते हैं

जहाँ रोशनी भी साथ नहीं देती,

पर तुम्हारे भीतर की छोटी-सी चिंगारी

ही रास्ता बन जाती है।


उस चिंगारी को पकड़ लो,

वही तुम हो…

वही तुम्हारा सहारा है…

वही तुम्हारा उद्धार।


- विजय कमल 

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